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गुरुवार, 25 मार्च 2010

नैनो में आग

जब सतीश सावंत मालाओं से सजी अपनी नई-नवेली नैनो को लेकर शोरूम से निकले, तो उनका मन झूम रहा था। घर पर उनके परिवारवाले भी अपनी नई
गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन उन्होंने सोचा भी नहीं था कि वह घर गाड़ी को नहीं, बल्कि बस एक बुरी खबर लेकर जाएंगे।

सावंत की कार को एक डीलर का एक एम्पलॉयी सावंत के घर लेकर जा रहा था, लेकिन शोरूम से निकलते ही गाड़ी में आग लग गई। कुछ ही देर में गाड़ी और उसके साथ सावंत की उमंगें धू-धू कर जल गईं।

इस घटना से टाटा मोटर्स को भी बड़ा सदमा लगा है। उसे समझ नहीं आ रहा है कि ऐसा कैसे और क्यों हुआ। कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि हम अब भी नहीं समझ पा रहे हैं कि ऐसा कैसे हुआ और इसके पीछे वजहें क्या थीं।

इससे पहले भी कुछ ऐसी घटनाएं हुई थीं, जब नैनो में धुआं उठने लगा था। लेकिन कंपनी का कहना है कि इस घटना और पहले हुई घटनाओं में कोई कनेक्शन नहीं है। प्रवक्ता ने कहा कि यह एक अलग घटना है और इसका पहले हुई घटनाओं से कोई लेनादेना नहीं है। प्रवक्ता के मुताबिक कार से धुआं निकलने की घटनाएं एक स्विच में फॉल्ट की वजह से हुई थीं। इसके लिए सड़क पर आ चुकी सभी गाड़ियों के पार्ट्स की अच्छी तरह से जांच कर ली गई थी।

कंपनी ने सावंत की गाड़ी में लगी आग की जांच शुरू कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट में फिर होगी महिला जज

नई दिल्ली चार साल के अंतराल के बाद सुप्रीम कोर्ट में फिर एक महिला जज के आने की तैयारी है। कॉलेजियम ने झारखंड हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा के नाम को हरी झंडी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि जस्टिस मिश्रा के साथ मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एचएन गोखले के नाम को भी मंजूरी दी गई है।



इनके नाम राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए विधि मंत्रालय को भेज दिए गए हैं। इस समय सुप्रीम कोर्ट में 28 जज हैं जबकि जजों की स्वीकृत संख्या 32 है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के स्वर्ण जयंती वर्ष में नियुक्त जस्टिस रूमा पाल 2006 में रिटायर हो गई थीं।



जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा झारखंड हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस हैं। उन्हें 1994 में पटना हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। वे राजस्थान हाईकोर्ट में भी करीब 14 साल जज रह चुकी हैं। उनके पिता सतीश चंद्र मिश्रा पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे।

रविवार, 21 मार्च 2010

रांदेवू ने आईपीएल टीम खरीद सबको हैरत में डाला


Bhaskarमुंबई. रांदेवू स्पोर्ट्स वर्ल्‍ड लिमिटेड ने आईपीएल की एक टीम की फ्रेंचाइजी खरीदकर कोच्चि को क्रिकेट के नक्शे पर उभार दिया है। यह न सिर्फ फ्रेंचाइजी खरीदने की दौड़ में शामिल प्रतिद्वंद्वियों, बल्कि आईपीएल अध्यक्ष ललित मोदी के लिए भी चौंकाने वाला रहा है।



चेन्नई में हुई नीलामी में फ्रेंचाइजी खरीदने के लिए जहां कारपोरेट घराने वीडियोकॉन अदाणी ग्रुप रेस में थे, वहीं सलमान खान-कैटरीना कैफ व सैफ अली खान-करीना कपूर जैसे बॉलीवुड सितारे भी वहां मौजूद थे। वहां किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि आईपीएल की टीम केरल के एक अनजान से बिजनेस ग्रुप की झोली में आएगी। वैसे, इसमें विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर की मुख्य भूमिका रही है, जिन्होंने रांदेवू को बोली लगाने के लिए प्रेरित किया।



थरूर ने ‘डीएनए’ से कहा, ‘उम्मीद है कि अब केरल से और क्रिकेट प्रतिभाएं सामने आएंगी।’ वहीं, मोदी ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं, तो मुझे इतनी बड़ी बोली लगने से हैरत ही हुई है। दोनों फ्रेंचाइजी से कुल मिलाकर 3235 करोड़ रुपए आए हैं। यह राशि आईपीएल की पहली आठ टीमों से मिली कुल राशि से करीब 25 फीसदी अधिक है।’ उन्होंने कहा कि रांदेवू (1533 करोड़) द्वारा वीडियोकॉन (1471 करोड़), अदाणी ग्रुप (1449 करोड़), पुणो कसोर्टियम (1200 करोड़) से ज्यादा बोली लगाना तो उम्मीदों से परे था। हालांकि, सहारा इंडिया द्वारा पुणो की फ्रेंचाइजी खरीदने से किसी को ज्यादा हैरत नहीं हुई।

शुक्रवार, 19 मार्च 2010

गुलज़ार

गीतकार गुलज़ार की गज़ल की पंक्तियां हैं- 'वक़्त रहता नहीं कहीं टिककर, इसकी आदत भी आदमी सी है.

मदरसा में आईआईटी की तैयारी


मदरसा

आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए रहमानी-30 काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है.

भारत में मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बहुत खराब है. ऐसे में किसी मदरसा में मिल रही तालीम से क्या मुसलमान छात्रों का भला हो सकता है?

इस सवाल का जवाब हमें बिहार की राजधानी पटना में मिलता दिखाई दे रहा है.

बिहार में आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी को लेकर सबसे पहले अभ्यानंद ने सुपर-30 के नाम से एक अनोखा प्रयोग किया था जो काफ़ी सफल रहा.

इसी सुपर-30 की कामयाबी से प्रेरित होकर पटना के एक मदरसे में रहमानी-30 की शुरुआत की गई. ये मदरसा क़रीब 100 वर्ष पुराने मकान में चलता है.

इस मदरसा में देश के उच्च तकनीकी संस्थान यानि आईआईटी में दाख़िले की तैयारी हो रही है.

विद्यार्थियों का एक साथ रहना, खाना और पढ़ाई करना मदरसा का मूलमत्र है. यहां कोई भेदभाव नहीं है, सब बराबर है.

मौलाना वली रहमानी

यहां विद्यार्थियों को न तो बैठने के लिए बेंचे हैं और न ही पढ़ाई करने के लिए पर्याप्त रोशनी.

इतनी विषम परिस्थितियों के बावजूद मौलाना वली रहमानी अत्यंत ग़रीब मुसलमानों के प्रतिभावान बच्चों को मुफ़्त में प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवा रहे हैं.

दोनों केंद्रों का मकसद एक ही है ग़रीब विद्यार्थियों को मुफ़्त में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराना.

सरकारी संस्था या निज़ी संस्था में नौकरी के कम अवसर के डर से बच्चे मदरसे छोड़ रहे थे, लेकिन मौलाना वली रहमानी की इस कोशिश से यहां एक बार फिर से बच्चे पढ़ने आ रहे हैं.

कामयाब छात्र

इरफ़न अहमद, मदरसा का छात्र

ग़रीब मुस्लिम के बच्चों के लिए यह एक वरदान साबित हो रहा है.

अभ्यानंद कहते हैं, “हमारे देश में कोई भी प्रतियोगिता परीक्षा हो बहुत ज़्यादा परीक्षार्थी होने के कारण इसमें कुछ ही सफल होते हैं जिससे परीक्षार्थी काफ़ी भयभीत रहते हैं.”

रहमानी-30 में पढ़ रहे विद्यार्थियों के बारे वे कहते हैं कि वहां पढ़ रहे बच्चे काफ़ी ग़रीब हैं, लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए दृढ़संकल्प हैं. अगर वे लोग ऐसा नहीं करते हैं तो समाजिक और आर्थिक रुप से पिछड़े ही रह जाएंगे.

रहमानी-30 के एक छात्र इरफ़ान आलम जिसकी उम्र मात्र 15 वर्ष है, 2011 की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. उनके पिताजी गांव में नाई हैं.

इरफ़ान आलम कहते हैं, “मैं अपनी ज़िंदगी में कुछ करना चहता हूं, कुछ बनकर दिखाना चाहता हूं.”

मौलाना वली रहमानी कहते हैं, “विद्यार्थियों का एक साथ रहना, खाना और पढ़ाई करना मदरसा का मूलमत्र है. यहां कोई भेदभाव नहीं है, सब बराबर है.”

मैं अपने ज़िंदगी में कुछ करना चहता हूं, कुछ बनकर दिखाना चाहता हूं.

इरफ़ान आलम, छात्र

रहमानी-30 के पहले बैच से सफल हुए सद्दाम अनवर अब आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं.

सद्दाम अनवर कहते हैं, “यहां आकर मेरा सपना सच हो गया है. मैं नहीं समझता हूं कि मैं दूसरे छात्रों से अलग हूं.”

भारत में मुस्लिम समुदाय को समान्य रुप से रूढ़िवादी, ग़रीब और कम शिक्षित कहा जाता है.

लेकिन बिहार की राजधानी में एक छोटी सी पहल से ऐसी धारणाओं को तोड़नें की कोशिश की जा रही है.

भारतीय हॉकी टीम के कोच ने मांगे अधिकार

hovkeyनई दिल्ली । वल्र्ड कप में निराशाजनक प्रदर्शन को इतिहास बताते हुए भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच जोस ब्रासा ने एक बार फिर टीम चयन और प्रशिक्षण फैसलों में अधिक अधिकारों की मांग की है।
स्पेन के ब्रासा ने बुधवार को हॉकी इंडिया के महासचिव नरेंद्र बत्रा, सदस्य अनुपम गुलाटी और कोच हरेंद्र सिंह के साथ लंबी बैठक की।



साढ़े चार घंटे की इस बैठक के बाद ब्रासा ने बताया कि उन्होंने भारतीय हॉकी का स्तर ऊंचा उठाने के लिए प्रोजेक्ट इंडिया तैयार किया है। उन्होंने कहा, मैंने चयन प्रक्रिया में प्रमुख कोच के लिए कुछ और अधिकारों की मांग की है। प्रमुख कोच टीम का महानिदेशक होना चाहिए। वह खिलाड़ियों और कप्तान के चयन के लिए जिम्मेदार होना चाहिए। उसे टीम के वार्षिक बजट तय करने का अधिकार मिलना चाहिए, जिनमें उपकरणों की खरीद-फरोख्त और दौरे तय करना शामिल हैं। वे पहले भी ऐसी मांगें करते रहे हैं।



इसके साथ ही ब्रासा ने कहा, मेरी टीम में खिलाड़ियों और सहयोगी स्टॉफ समान विचारों वाला होना चाहिए और उन्हें मुझ पर भरोसा होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भारत में हॉकी में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप किया जाता है, जबकि यूरोपीय देशों में केवल एक संस्था होती है, जो खेल पर नियंत्रण रखती है।



हालांकि, खेल मंत्रालय के पास अंतिम अधिकार मौजूद है लेकिन वह हस्तक्षेप नहीं करता है। उन्होंने कहा, भारत में हमारे पास हॉकी इंडिया और भारतीय खेल प्राधिकरण हैं, लेकिन मुझे कई बार यह पता नहीं होता कि किससे बात करनी है।– पूर्व स्पेनिश खिलाड़ी अब भारतीय हॉकी में घरेलू ढांचे की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू हॉकी को चार वर्गो अंडर-14,16,18 और अंडर-23 में बांटा जाए व इन खिलाड़ियों की आयु पर सख्त निगरानी रखी जाए।

गुरुवार, 18 मार्च 2010

कितना किसको होगा फायदा (केंद्रीय कर्मचारियों)

नई दिल्ली. महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को भले ही सरकार कोई राहत नहीं दे पाई हो लेकिन अपने 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ाने का फैसला कर लिया है। कैबिनेट की शुक्रवार को हुई बैठक में महंगाई भत्ता आठ फीसदी बढ़ाकर 27 से 35 फीसदी कर दिया गया है। बढ़े महंगाई भत्ते का लाभ पेंशनभोगियों को भी मिलेगा। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, डीए की बढ़ी किस्त एक जनवरी से लागू हो सकती है। इससे कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है।

जानकारों के अनुसार इस बढ़ोतरी से सरकार पर छह हजार करोड़ रूपए का बोझ बढ़ेगा।

कितना किसको होगा फायदा

वेतनमान -- फायदा

4440--355
7440--595
8700--696
15600--1248
20200--1616
34000--2720
39100--3128